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डॉ0 बी आर सक्‍सेना सेवानिवृत


राजकीय वरिष्‍ठ माध्‍यमिक पाठशाला निरमण्‍ड कुल्‍लू के प्राचार्य डॉ बी आर सक्‍सेना आज राजकीय सेवा से सेवानिवृत हो गये। डॉ सक्‍सेना प्रेरक व्‍यक्तित्‍व रहे है और जीवन संघर्ष पूर्ण। हिमशिक्षा को उन्‍होने सदैव प्रोत्‍साहित किया है। उन्‍होने हिमशिक्षा से अपने अनुभव साझा किऐ 

आखिर जिंदगी के 58 साल कैसे गुजरे मालूम ही नहीं हुआ........और 40 वर्ष सरकारी सेवा करने के उपरान्त आज सेवा निवृत हो गया........प्रिय मित्रो में आज आप लोगो के समक्ष अपने 58 वर्ष के टेढ़े मेढे रास्तों,कठिनयियो और उपलब्धियोंका जो अनुभव पाया है उसे बांटना चाहता हु!मेरा जन्म अवेरा(निरमंड) जिला कुल्लू में 25-12-1957 को श्रीमती सजू देवी एवं श्री महूरी राम जी के घर हुआ !अभी मेरी उम्र मुश्किल से 10 वर्ष थी और में चौथी कक्षा का छात्र था,मेरे पिताजी का देहांत हो गया!घर कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मुझे चौथी से दसवीं कक्षा कि पढाई के बीच चार बार स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा! फिर भी जैसे तैसे मेने 1975 में दसवीं कि परीक्षा 75% अंक लेकर उत्तीर्ण की!इसी दौरान मेने अपनी पढाई जारी रखने के लिए लोक निर्माण विभाग एवं वन विभाग में बेलदार के रूप में कार्य किया!1975-76 में मेने आईटीआई शमशी से हिंदी स्टेनोग्राफी का कोर्स किया लेकिन इसमें रोज़गार की उम्मीद ना होने के कारण मेने इसमें रुचि नही ली!1976 में मेरी नियुक्ति भारतीय डाक विभाग में क्लर्क के रूप में हुई और 1993 तक मेने इस विभाग में जिला किनौर और शिमला के भिन्न भिन्न डाकघरों में सेवाएँ दी!इसी बीच वर्ष 1979 मेरा विवाह श्रीमती संतोष सक्सेना(JBT)अध्यापिका के साथ हुआ व् बाद में वे रामपुर बुशहर से खंड शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत हुए!

मेने डाक विभाग में रहते हुए एवं विवाह के उपरान्त प्राइवेट छात्र के रूप में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास किया तथा 1997 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से PhD की उपाधि प्राप्त की!वर्ष 1993 में मेने डाक विभाग से त्याग पत्र दिया तथा शिक्षा विभाग में प्रवक्ता इतिहास के रूप में नियुक्ति पायी!वर्ष 2010 में मैं प्रधानाचार्य के रूप में पदोन्नत हुआ तथा आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला निरमंड से प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत होने का अवसर प्राप्त हुआ! इस अवसर पर डाक मंडल रामपुर बुशहर के अधीक्षक श्री सुरजीत सिंह,सहायक अधीक्षक Rekongpeo श्री सुधीर वर्मा .,Dr L R Chhati ,श्रीमती अमिता गुप्ता ,विद्यालय के सभी अध्यापक , smc प्रधान गुरुदर्शन शर्मा ,smc के सभी सदस्य ,अभिभावक वर्ग ,छात्र छात्राएं , सेवानिवृत प्रधानाचार्य केशव राम ,हेड मास्टर भीम वर्मा , योग राज ठाकुर , श्री कृषण ठाकुर , शकुन्तला ठाकुर सहित लगभग 700 लोग उपस्थित थे 1

प्राथमिक शिक्षक संघ का राज्याध्यक्ष देवेंद्र केवला

हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ का राज्याध्यक्ष देवेंद्र केवला को नियुक्त किया गया है। संघ की राज्य स्तरीय गठन प्रक्रिया हमीरपुर के सीनियर सेकेंडरी स्कूल बाल में आयोजित की गई, जिसमें समस्त प्राथमिक अध्यापकों ने देवेंद्र केवला को सर्वसम्मति से चुना। प्रदेश भर के प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर अपने विचार रखे तथा संघ की मुख्य मांगों पर चर्चा की। इनमें कुल्लू से इंद्र ठाकुर, शिमला से देवेंद्र केवल, सोलन से हिमांशी, लाहुल से दोरजे, ऊना से पुष्पेंद्र व हमीरपुर से राजेश पठानिया भी शामिल हुए। इस अवसर पर कुल्लू, सोलन व शिमला जिला की कार्यकारिणी को भी मान्यता दी गई। इसमें कुल्लू से प्रधान धर्म चंद शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान कुलदीप ठाकुर, महासचिव सत्यपाल ठाकुर, कोषाध्यक्ष तेजा सिंह ठाकुर, महालेखाकार जी चैने राम, जिला सोलन से प्रधान सतिंद्र पाल कौर, उपप्रधान जोगा सिंह, महासचिव रमेश कुमार, कोषाध्यक्ष लेख राज, शिमला से प्रधान मदन वर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान जगदीश चौहान, महासचिव यशवंत खिमटा, कोषाध्यक्ष रामलाल, लेखाकार बहादुर लाल शर्मा शामिल हैं। इस मौके पर सभी वक्ताओं ने राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पंजीकृत संघ के तले सभी शिक्षकों को एकजुट करने का भी संकल्प लिया

पैट नौ वर्ष के बाद भी रेगुलर नहीं

प्राथमिक सहायक अध्यापकों (पैट) ने प्राथमिक शिक्षक संघ (पीटीएफ) के साथ मिलकर एक बैनर तले अपने हकों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया है। शिमला में रविवार को आयोजित बैठक में पैट ने पीटीएफ संघ के पदाधिकारियों को सम्मानित किया। बैठक में पैट के नियमितीकरण और ट्रांसफर पालिसी बनाए जाने को लेकर चर्चा की गई। संघ के प्रदेशाध्यक्ष लखवीर धीमान ने बताया कि पैट व ग्रामीण विद्या उपासकों की नियुक्ति एक ही पालिसी के तहत की गई थी। पूर्व सरकार ने ग्रामीण विद्या उपासकों को तो रेगुलर कर दिया, लेकिन पैट को नौ वर्ष से अधिक के कार्यकाल के बाद भी रेगुलर नहीं किया जा रहा है। इससे शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हो गए हैं। यही नहीं पूर्व सरकार ने ग्रामीण विद्या उपासकों को रेगुलर करने से पहले ही अनुबंध जेबीटी का वेतनमान दे दिया था, लेकिन पैट को अब तक अनुबंध जेबीटी का वेतन नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से ग्रामीण विद्या उपासकों की तर्ज पर बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा की शर्त थोपे रेगुलर किए जाने की मांग की है। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंद्र मनकोटिया ने बताया कि आज के बाद पैट की लड़ाई पीटीएफ शिक्षक संघ के साथ मिलकर लड़ी जाएगी।

दीप राम रा. व. मा. पाठशाला कुमारसेन स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष चुने गए

 
              गत छ: मई को रा. व. मा. पाठशाला कुमारसेन की नई स्कूल प्रबंधन समिति का गठ्न किया गया ! इस में दीप राम आज़ाद को सर्व सम्मति से तीसरी बार अध्यक्ष चुना गया ! अन्य सदस्यों का चुनाव भी सम्मति से हुआ ! इस अवसर पर विदयालय प्रमुख श्री योगेंद्र मखैक ने अभीभावकों से विद्यालय् का सहयोग करने की अपील की ! आम सभा में सभी अध्यापक मौजूद थे !

YOUNG LEADERS for CHANGE AWARD

Respected Educationists..... There are many Innovative Efforts being undertaken at Different Levels.... Kindly go through them and Contribut from your side for making a BRIGHTER WORLD kindly look forward for YOUNG LEADERS for CHANGE AWARD for STUDENTS in the field fo ENVIRONMENTAL CONSERVATION paryavaranmitra@ceeindia.org

इंद्रसिंह चौहान भारत शिक्षा रत्न से सम्मानित

हिमाचल प्रदेश के मण्‍डी जिला में  सुंदरनगर  उपमंडल के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कनैड में बतौर प्रधानाचार्य तैनात इंद्रसिंह चौहान 29 अप्रैल को दिल्ली में भारत शिक्षा रत्न सम्मान से नवाजे जाएंगे। यह सम्मान उन्हें शिक्षा और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता लाने के लिए दिल्ली स्थित ग्लोबल सोसायटी फॉर हैल्थ एंड एजुकेशन की ओर से प्रदान किया जाएगा। यह संस्था देश भर में अपने स्तर पर व्यापक सर्वे करवाती है। इंद्रसिंह चौहान प्रदेश के एकमात्र शिक्षाविद् हैं, जिनका चयन इस पुरस्कार के लिए किया गया है। 

स्‍वामी विवेकानन्‍द की 150 वी जयन्‍ती

 स्‍वामी विवेकानन्‍द की 150 वी जयन्‍ती के अवसर पर शिमला के इन्दिरा गांधी खेल परिसर में युवा सेवा एवं खेल विभाग ने विभिन्‍न सांस्‍कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। आयोजन के मुख्‍य अतिथि विभाग के उप निदेशक श्री विरेन्‍द्र नेगी थे1  जिला युवा सेवाऐं एवं खेल अधिकारी ओ पी भोटा ने स्‍वामी विवेकानन्‍द के चित्र पर माल्‍यार्पण किया और द्वीप प्रजवल्लित कर कार्यक्रम का शुभारम्‍भ किया।  अपने सम्‍बोधन में मुख्‍यातिथि ने युवाओं से स्‍वामी विवेकानन्‍द की शिक्षाओं को जीवन में आत्‍मसात करने का आहवान किया।
उन्‍होने युवाओं से एक स्‍वच्‍छ समाज में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह कर विवेकानन्‍द की शिक्षाओं के प्रसार प्रचार पर बल दिया। उन्‍होने विजेताओं को पुरस्‍कार भी वि‍तरित किये।

 परिणाम इस प्रकार रहे।
चित्रकला प्रतियोगिता 
प्रथम  अतर सिंह, ढली
द्वितीय नयनसी, ढली
तृतीय राधा, ढली

निबन्‍ध लेखन 
प्रथम  मानसी, ढली
द्वितीय निशान, शिमला
तृतीय सुरेन्‍द्र,



भाषण प्रतियोगिता
प्रथम रजनी, शिमला
द्वितीय प्रतिभा, शिमला
तृतीय सुनीता, शिमला


लोक समूह गान
प्रथम  सांस्‍कृतिक दल ठियोग
द्वितीय आई टी आई शिमला


ओ पी भोटा ने बताया कि जिले भर में सात अलग अलग स्‍थानों पर स्‍थानीय युवा मण्‍डलों के सहयोग से इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाऐगे। राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम 19 जनवरी 2013 को शिमला में आयोजित किया जाऐगा।

प्लस वन-टू में स्कूली छात्र सीख सकेंगे संगीत

संगीत छात्र कल्याण सगंठन ने संगीत विषय को छठी कक्षा से शुरू करने की मांग की है। संघ का प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को लेकर शिक्षा सचिव व प्रधान वित्त सचिव से मिला। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के प्रधान राजेश चौहान, उपप्रधान मदन झाल्टा व प्रतिनिधि सदस्य सीमा देवी शामिल थे। स्कूलों में संगीत विषय के रूप में छठी कक्षा से शुरू कर रखा है। शिक्षा सचिव व प्रधान वित्त सचिव ने संगठन द्वारा उठाई मांगों को गंभीरता से लिया है तथा भविष्य में संगीत विषय को छठी कक्षा तथा प्लस वन, प्लस टू में शुरू करवाने का आश्वासन दिया। संगठन के उपाध्यक्ष मदन झालटा ने कहा कि प्रदेश के सभी कालेजों में संगठन अपनी कार्यकारिणी का गठन करेगा।

साभार:दिव्य हिमाचल

छठी कक्षा के बच्चों को भी मिलेगा वजीफा

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए छठी कक्षा के छात्रों को स्कॉलरशिप देने का निर्णय लिया है। इसके लिए बोर्ड छठी कक्षा के छात्रों का विशेष टेस्ट लेगा। इसमें मैरिट के प्रत्येक ब्लॉक के पांच छात्रों का चयन किया जाएगा और तीन वर्ष तक एक हजार रुपए की दर से छात्रवृत्ति दी जाएगी। मैट्रिक परीक्षा के आधार पर 400 छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति की राशि 6000 से बढ़ाकर 7200 रुपए वार्षिक के हिसाब से दो वर्ष तक छात्रवृत्ति दी जाएगी। जमा दो के आर्ट्स स्ट्रीम के 100 छात्रों की छात्रवृत्ति राशि 8400 से बढ़ाकर 10 हजार कर दी गई है। इसके अलावा जमा दो के ही साइंस स्ट्रीम के सौ छात्रों को सालाना मिल रही 10 हजार की स्कॉलरशिप बढ़ाकर स्ट्रीम 12 हजार कर दी गई है। नौवीं और  जमा एक की कक्षाओं के लिए बोर्ड सभी विद्यालयों को प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाएगा। पेपर मुद्रण का खर्चा 50 बोर्ड तथा 50 शिक्षा विभाग करेगा। स्कूल  अपने स्तर पर उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेगा और बोर्ड सैंपल के तौर पर उक्त मूल्यांकन की समीक्षा समय-समय पर करेगा।
source:divya himachal

अब बच्चों को मिलेगा 'लैपटॉप

हिमाचल प्रदेश में दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ग्यारहवीं कक्षा में प्रवेश पाने वाले 4000 टॉपर छात्रों को जल्द लैपटॉप मिलेंगे। प्रदेश सरकार ने पहले ऐसे छात्रों को आकाश टैबलेट देने की बात कही थी, मगर अब उससे बेहतर क्वालिटी के लैपटॉप मुफ्त उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है, जिसकी प्रक्रिया आरंभ हो गई है।
10 से 15 हजार होगी कीमत:
प्रदेश सरकार की तरफ से उपलब्ध करवाए जाने वाले लैपटॉप की कीमत दस से 15 हजार के बीच होगी। प्रदेश सरकार ने यह निर्णय केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल के उस निर्णय के बाद लिया है, जिसमें उन्होंने स्कूल स्तर पर आकाश टैबलेट देने की घोषणा की थी। केंद्र सरकार की तरफ से दिए जाने वाले इस टैबलेट की कीमत 2,999 रुपए आंकी गई हैं, जबकि प्रदेश में उससे बेहतर लैपटॉप दिए जाएंगे।इसलिए देंगे लैपटॉप
आकाश टैबलेट के स्थान पर छात्रों को लैपटॉप देने का निर्णय इसलिए बदला गया, ताकि छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सके। इसमें आकाश टैबलेट की अपेक्षा अधिक फीचर होंगे। साथ ही छात्र इसका प्रयोग आसानी से कर सकेंगे।
सरकार उठाएगी खर्चा
लैपटॉप देने के लिए प्रदेश सरकार स्वयं खर्च वहन करेगी। इस पर कितना खर्च आएगा, यह पता टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चलेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अपने बजट भाषण में दसवीं कक्षा में सबसे अधिक अंक लेने वाले चार हजार छात्रों को लैपटॉप देने की घोषणा की थी।
आमंत्रित किए टेंडर
प्रदेश सरकार ने लैपटॉप देने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के माध्यम से टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं। ये टेंडर 19 जून को खुलेंगे, जिसमें राष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी कंपनियों के भाग लेने की संभावना है।
क्या कहते हैं प्रधान सचिव वित्त: 
प्रधान सचिव वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी के अनुसार, सरकार आकाश टैबलेट की बजाए अच्छी क्वालिटी के लैपटॉप देगी। टेंडर 19 जून को खुलेंगे, जिसके बाद वस्तुस्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
टेंडर की शर्ते
कंपनी राष्ट्रीय स्तर की हो
कंपनी ब्लैक लिस्ट न हो
दो साल की गारंटी हो
3 साल में 1000 करोड़ का कारोबार
ऐसी कंपनी, जिसके विक्रेता पूरे देश में हो
शिक्षा मंत्री बोले, जल्द देंगे तोहफा
शिक्षा मंत्री आईडी धीमान का कहना है कि सरकार जल्द लैपटॉप उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा, इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अटल स्कूल यूनीफार्म के बाद सरकार दसवीं में टॉप रहे 4000 छात्रों को अब लैपटॉप का तोहफा देगी।
 source:bhaskar.com

स्कूलों को छुट्टियों की नई अवकाश सारणी तय अवकाश सारणी

राज्य मंत्रिमंडल की सोमवार को आयोजित बैठक में शिक्षण संस्थानों के लिए नई अवकाश सारणी जारी की गई, जो कि इसी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। इसके मुताबिक लाहुल-स्पीति जिला को छोड़कर अन्य ग्रीष्मकालीन अवकाश वाले स्कूल 25 जून से 30 जुलाई तक 36 दिनों तक बंद रहेंगे। छह दिन का त्योहार अवकाश भी स्कूलों में रहेगा, जो कि दीपावली से दो दिन पूर्व आरंभ होगा। इसी प्रकार शैक्षणिक सत्र में 10 दिन का शरदकालीन अवकाश सात से 16 जनवरी तक रहेगा। कुल्लू जिला में त्योहार के उपलक्ष्य में छह दिवसीय अवकाश दशहरा उत्सव से एक दिन पहले आरंभ होगा। लाहुल-स्पीति जिला में ग्रीष्मकालीन अवकाश 17 जुलाई से 27 अगस्त तक रहेगा, जबकि त्योहार के उपलक्ष्य में छह दिवसीय अवकाश कुल्लू जिला की अवकाश सारिणी के अनुरूप रहेगा, जो कि 10 दिवसीय अवकाश के साथ संपन्न होगा। शीतकालीन अवकाश वाले स्कूल मानसून के दौरान 10 दिन तक 21 से 30 जुलाई तक बंद रहेंगे। इसी प्रकार शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों में छह दिन का त्योहार अवकाश दीपावली से दो दिन पूर्व आरंभ होगा। इन स्कूलों में शरदकालीन अवकाश पहली जनवरी से पांच फरवरी तक रहेगा। जनजातीय क्षेत्र किन्नौर, पांगी और भरमौर में शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों की अवकाश सारणी लागू होगी। राज्य सरकार ने डिग्री कालेजों की अवकाश सारिणी भी संशोधित कर दी है। नई सारणी के मुताबिक प्रदेश के कालेज में 65 दिनों तक बंद रहेंगे। प्रदेश के कालेज दो से 31 मई तक 30 दिन के लिए बंद रहेंगे।
साभार :दिव्य हिमाचल

हर स्कूल को मिलेंगे क्लास रूम

प्रदेश भर मेंस्कूल भवन निर्माण पर अब महंगाई बाधा नहीं बनेगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बनने वाले क्लास रूमों के बजट में दोगुनी बढ़ोतरी कर दी है। प्रदेश भर में प्राइमरी, अपर प्राइमरी स्कूलों को सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक क्लास रूम निर्माण के लिए अब चार लाख रुपए की राशि प्राप्त होगी, जबकि पूर्व में क्लास रूम निर्माण के लिए दो लाख 85 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाती थी। विभाग ने इस बाबत आदेश जारी कर बजट का प्रावधान भी कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2012-13 में स्कूलों को प्रत्येक क्लास रूम निर्माण के लिए दो लाख 85 हजार रुपए की बजाय चार लाख रुपए की राशि प्रदान की जाएगी। यही नहीं, विभाग ने हैडमास्टर रूम निर्माण के लिए भी राशि में बढ़ोतरी कर दी है। हैडमास्टर कमरों के लिए भी अब चार लाख रुपए का बजट प्रदान किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो विभाग ने सर्वशिक्षा अभियान के तहत दिए जाने वाले बजट में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग सर्वशिक्षा अभियान के तहत क्लास रूमों से वंचित स्कूलों को प्रयाप्त भवन उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अलावा हेैडमास्टरों के लिए भी अलग से कमरों का निर्माण किया जा रहा है। विभाग हैडमास्टर सहित क्लास रूमों के लिए दो लाख 85 हजार रुपए की राशि उपलब्ध करवा रहा था, परंतु बढ़ती महंगाई के चलते विभाग द्वारा तय नियमों के मुताबिक कमरों के निर्माण मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई ऐसे भवन हैं जो बजट के अभाव के चलते अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। सूत्रों के मुताबिक जिला परियोजना अधिकारियों व अध्यापकों ने शिक्षा विभाग से कमरों का बजट बढ़ाने की गुजारिश की थी। विभाग ने जिला स्तर इस साल बनने वाले नए कमरों का लक्ष्य निर्धारित कर बजट का प्रावधान भी कर दिया है। इस बारे में एसएसए के परियोजना अधिकारी मोहिंद्र चंदेल ने बताया कि स्कूलों में बनने वाले क्लास रूमों व हैडमास्टर रूमों के निर्माण को अब चार लाख रुपए दिए जाएंगे।

साभार:दिव्य हिमाचल

यूनीफार्म पर हर साल 45 करोड़ खर्च करेगी सरकार

प्रदेश में पहली से दसवीं कक्षा तक दी जाने वाली यूनीफार्म के दाम तय कर दिए गए हैं। जो यूनिफार्म छात्रों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी, सरकार को उसके दाम चुकाने पड़ेंगे। 

इसके 124 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। यूनीफार्म गुणवत्ता जांच के लिए टैक्सटाइल इंजीनियरिंग कॉलेज सुंदरनगर की मदद ली जा रही है। यूनीफार्म को उपलब्ध करवाने के लिए सरकार पर सालाना करीब 45 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। 

9,27,205 बच्चों को होगा लाभ

9,27,205 बच्चों को यूनीफार्म दी जाएगी। इसमें 4,63,680 लड़के और 4,63,525 लड़कियां हैं, जिनको इस साल यह यूनीफार्म दी जानी है। इस बार यह यूनीफार्म गुप्ता टैक्सटाइल ट्रेडिंग कंपनी अंबाला की तरफ से उपलब्ध करवाई जाएगी, जिसने न्यूनतम दर पर इसे उपलब्ध करवाने की बात कही है।

आज की बैठक में होगा मंथन

सरकारी स्कूलों में दी जाने वाली यूनीफार्म को लेकर नौ अप्रैल को सभी जिला के डिप्टी डायरेक्टर की बैठक बुलाई गई है। डायरेक्टर एलिमेंटरी राजीव शर्मा के अनुसार, बैठक में यूनीफार्म आवंटन को लेकर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के निर्देशानुसार इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी।

यह है नई यूनिफार्म

अटल स्कूल यूनीफार्म में छात्रों को ग्रे पेंट और स्काई ब्लू शर्ट दी जाएगी। छात्राओं के लिए रेड चेक कमीज एवं सफेद सलवार के साथ सफेद चुन्नी दी जाएगी।

लड़कों के लिए 

कक्षा राशि रुपए में
1-5 199
6-10 227.90

लड़कियों के लिए 

कक्षा राशि रुपए में
1-5 201.90
6-10 299.90
साभार:भास्कर

हिमाचल में नहीं बनेगा पे-कमीशन

मौजूदा समय में प्रदेश सरकार अपना स्वतंत्र पे कमीशन नहीं बनाएगी। मुख्य सचिव द्वारा हाई कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा गया है कि सरकार फिलहाल स्वतंत्र पे कमीशन बनाने के हक में नहीं है। सरकार का कहना है कि किसी भी राज्य का अपना स्वतंत्र पे कमीशन बनाना जरूरी नहीं है। पूरे देश में 21 राज्य ऐसे हैं, जिनके पास स्वतंत्र पे कमीशन नहीं है। इनमें 20 राज्य केंद्रीय पे कमीशन की सिफारिशों को अमल में लाते हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश पंजाब पे कमीशन की सिफारिशों को मानता है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में अपना स्टाफ पैटर्न होने के कारण पंजाब पे स्केल की सिफारिशों को ज्यों का त्यों अपनाना मुश्किल होता है तथा प्रत्येक वर्ग के लिए सोच समझ कर उक्त कमीशन की सिफारिशों पर अमल में लाया जाता है। सरकार को हाई कोर्ट द्वारा दिए गए स्वतंत्र पे कमीशन बनाने के निर्देशों पर सरकार ने कहा है कि फिलहाल प्रदेश में वर्ष 2006 के पंजाब पे कमीशन की सिफारिशों पर कर्मियों की पे रिवाइज की जा चुकी है। अतः अभी पे कमीशन के गठन पर विचार नहीं किया जा रहा है। सरकार ने कहा है कि जब भी नए पे स्केल रिवाइज किए जाने हैं, तब वह उच्च न्यायालय के आदेशों को संबोधित करेंगे। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा पंजाब पे स्केल रिवीजन पर ढुलमुल रवैये के कारण न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले कुछ शिक्षकों की याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए थे कि वह आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी अपना पे कमीशन नहीं बना पाया है। अतः वह इस बारे विचार कर तीन माह में निर्णय ले। सरकार ने फिलहाल पे कमशन के गठन से इनकार कर दिया।


saabhaar :divya himachal

सभी स्ट्रीम का रिजल्ट एक साथ

धर्मशाला  अगले सप्ताह से शुरू हो रही हिमाचल प्रदेश की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम को लेकर बोर्ड ने अहम बदलाव किया है। पहली बार स्कूल शिक्षा बोर्ड आर्ट्स, कामर्स, वोकेशनल तथा साइंस स्ट्रीम का रिजल्ट एक साथ घोषित करेगा। इतना ही नहीं इस दफा सभी कक्षाओं के परीक्षा परिणाम मई माह में घोषित होंगे। एक साथ रिजल्ट निकालने के बावजूद सभी संकायों की अलग-अलग मैरिट निकाली जाएंगी। बोर्ड सचिव प्रभात शर्मा ने खबर की पुष्टि की है। उनका कहना है कि इससे पूर्व स्कूल शिक्षा बोर्ड साइंस स्ट्रीम का परीक्षा परिणाम पहले घोषित कर देता था। परीक्षा के बेहतर संचालन और इसकी गोपनीयता बनाए रखने के लिए बोर्ड ने इस बार सभी संकायों का परीक्षा परिणाम एक साथ घोषित करने का कड़ा फैसला लिया है। उल्लेखनीय है कि राज्य में स्कूल शिक्षा बोर्ड की आम परीक्षाएं अगले माह दो मार्च से शुरू हो रही हैं। ये परीक्षाएं 26 मार्च को संपन्न हो जाएंगी और 27 मार्च से मूल्यांकन प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। इसके लिए बोर्ड ने राज्य भर में 29 मूल्यांकन केंद्र स्थापित किए हैं। पिछले वर्ष उक्त केंद्रों की संख्या 31 थी। बोर्ड परीक्षाआें में इस बार कुल दो लाख 58 हजार छात्र वार्षिक परीक्षा में बैठेंगे। इसके लिए प्रदेश भर में 1590 परीक्षा केंद्र स्थापित किए हैं। इनमें शामिल जनजातीय क्षेत्रों के परीक्षा केंद्रों के लिए बोर्ड ने परीक्षा सामग्री भेज दी है। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के तमाम प्रबंध पूरे कर लिए हैं और इस बार पहले के मुकाबले आम परीक्षा का बेहतर संचालन होगा।

सीधा खाते में जाएगा वजीफे का पैसा

प्रदेश में विद्यार्थियों को यंग साइंटिस्ट बनाने के मकसद से शुरू की गई ‘बच्चे साइंस पढ़ें स्कॉलरशिप स्कीम’ में बदलाव किया गया है। अब पात्र विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप के तहत मिलने वाली पांच हजार रुपए की राशि सीधे अकाउंट में जमा होगी। इससे पहले ड्राफ्ट के माध्यम से छात्रों को स्कॉलरशिप मिलती थी। निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों को इस साल अप्रैल महीने में ही पात्रों का चयन कर रिपोर्ट जल्द प्रेषित करने के आदेश जारी किए हैं। इसकी पुष्टि प्रारंभिक शिक्षा विभाग चंबा के उपनिदेशक सुशील पुंडीर ने की है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में छात्रों को यंग साइंटिस्ट बनाने के लिए सरकार ने ‘बच्चे साइंस पढ़ें स्कॉलरशिप स्कीम’ शुरू कर रखी है, जिसके तहत हर साल पात्र विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है। हर स्कूल में छठी, सातवीं और आठवीं कक्षाओं के लिए एक ग्रुप और नौवीं व दसवीं कक्षाओं का एक ग्रुप बनाया गया है। स्कॉलरशिप के तहत प्रति छात्र पांच हजार रुपए की राशि दी जाती है। विडंबना यह रहती है कि पात्रों के चयन के लिए अगस्त माह से भी अवधि बढ़ जाती है, जिसके चलते समय पर पात्रों के नाम सूचीबद्ध न होने से शिक्षा विभाग को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बेकार के झमेलों से निजात दिलाने के लिए सरकार ने ताजा स्थिति में प्रक्रिया को सरल बना दिया है। हालांकि पहले ड्राफ्ट के माध्यम से छात्रों को स्कॉलरशिप दी जाती थी, लेकिन नई प्रक्रिया में अब पात्र बच्चों को स्कॉलरशिप सीधे अकाउंट में जमा करवा दी जाएगी। यही नहीं, अप्रैल महीने में ही पात्रों का चयन होगा और समय पर स्कॉलरशिप पात्रों के अकाउंट में जमा हो जाएगी। बहरहाल, सरल प्रक्रिया के बाद अब निदेशालय के आदेशानुसार सभी उपनिदेशकों ने स्कूलों के मुखियाओं को जल्द से जल्द पात्र छात्रों के नाम की सूची प्रेषित करने के लिए निर्देशित किया है। अप्रैल माह में ही सूची निदेशालय भेज दी जाएगी। उधर, इस बारे में प्रारंभिक शिक्षा विभाग चंबा के उपनिदेशक सुशील पुंडीर ने बताया कि ‘बच्चे साइंस पढ़ें’ स्कॉलरशिप के तहत चंबा जिला को 42.25 लाख रुपए का बजट मिला है। उन्होंने बताया कि स्कॉलरशिप के लिए चयनित बच्चों को पांच हजार रुपए की छात्रवृत्ति प्रति छात्र प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि पात्रों की सूची मिलते ही इसकी रिपोर्ट निदेशालय भेजी दी जाएगी।

स्कूली दाखिलों में हिमाचल फिर बेस्ट

शिमला —   विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा देने के मामले में हिमाचल प्रदेश फिर सर्वश्रेष्ठ बनकर सामने आया है। शिक्षा के क्षेत्र में पहाड़ी राज्य हिमाचल केरल और पुड्डूचेरी को कड़ी चुनौती दे रहा है। शिक्षा से जुड़ी ‘प्रथम’ संस्था की ताजा रिपोर्ट में हिमाचल को बेहतर शिक्षा देने वाला राज्य आंका गया है। रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल के छह से 14 आयु वर्ग के 99.4 फीसदी बच्चे स्कूल जा रहे हैं। हिमाचल में एक दशक पहले तक 19 फीसदी से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। हाल के वर्षों में शिक्षा विभाग द्वारा किए गए प्रयासों के चलते यह आंकड़ा करीब-करीब शून्य के पास पहुंच गया है। अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 के लागू हो जाने के बाद पूरी उम्मीद है कि हिमाचल के शत-प्रतिशत बच्चे स्कूल जाएंगे। छात्रों के पंजीकरण में अब केरल और मिजोरम ही हिमाचल से आगे रहे हैं। वर्ष 2011 के सर्वेक्षण में हिमाचल प्रदेश पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा व पुड्डूचेरी को पछाड़ कर आगे निकल चुका है। हिमाचल में शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य हासिल करने के लिए एजुकेशन गारंटी स्कीम सेंटर, अल्टरनेटिव इन्नोवेटिव सेंटर और गैर-आवासीय ब्रिज कोर्स की मदद ली गई। बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, पठन-पाठन सामग्री के साथ-साथ स्कूल ड्रेस भी निःशुल्क में दी जा रही है। शिक्षा मंत्री आईडी धीमान ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों से हिमाचल की गिनती देश के अग्रणी राज्यों में की जा रही है। उन्होंने बताया कि शिक्षा पर जितना बजट राज्य की भाजपा सरकार खर्च कर रही है, इतना अधिक बजट देश के किसी भी राज्य में सरकारें व्यय नहीं कर रही हैं।

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शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति योजना बंद

हिमाचल में शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति योजना को बंद कर दिया गया है। प्रदेश सरकार के इस अहम फैसले के साथ  ही राज्य के 26 हजार से अधिक प्राथमिक शिक्षकों ने भी राहत की सांस ली है। योजना को बंद करने के बाबत प्रदेश सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। पूर्व में प्रदेश सरकार ने शिक्षा विभाग में बीच सत्र में शिक्षकों को रिटायरमेंट पर न भेजने का फैसला लिया था। बहरहाल सरकार के उक्त आदेश अप्रैल माह से शुरू होने जा रहे थे। सूचना के अनुसार प्रदेश सरकार ने पूर्व में शिक्षकों को बीच सत्र में सेवानिवृत्त न करने का फैसला लिया था। सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने आवाज बुलंद करते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी। इसके पीछे संघ का तर्क था कि सही मायनों में शिक्षकों को  योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा शिक्षा विभाग के बीपीईओ, निदेशक, डिप्टी डायरेक्टर समेत अन्य अधिकारियों को ही इसका लाभ मिल पाया। सूत्रों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय राज्य में खासकर प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति में भी रुकावट बन गया था।  लिहाजा   दो वर्षों से यह योजना  प्राथमिक शिक्षकों के लिए गले की फांस बनी हुई थी। हांलाकि निर्णय को लेकर सरकार का तर्क था कि बीच सत्र में शिक्षक के रिटायर होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उधर, प्राथमिक शिक्षक संघ का तर्क है कि  शिक्षक तर्क दे रहे थे कि शिक्षा का अधिकार कहीं यह नहीं कहता कि वही शिक्षक या अधिकारी रिटायर होने के बाद भी साल भर पद पर बना रहे। लिहाजा सरकार व विभाग पूर्व में ही इन रिक्त होने जा रहे पदों के लिए पैनल तैयार रखे तथा समय रहते इन पदों को भरे ,ताकि पठन-पाठन कार्य प्रभावित न हो।

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स्कूलों में नहीं होंगे सास-बहू के नाटक

 स्कूलों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों से सास एवं बहू के बीच तकरार दर्शाने वाले गाने और नाटक करवाने वालों की अब खैर नहीं होगी। ऐसा करना स्कूल प्रबंधन के सामने मुश्किल खड़ी कर सकता है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। सरकार ने स्कूलों में सास-बहू के रिश्तों में नकारात्मक प्रभाव डालने वाले नाटकों और गानों के मंचन पर रोक लगा दी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के नाटकों से बच्चों खासकर लड़कियों में छोटी उम्र से ही रिश्तों के प्रति कड़वाहट पैदा हो जाती है। और यदि बच्चों की नींव में ही इस तरह के दुष्प्रभाव आ जाएंगे तो वह अच्छे नागरिक नहीं बन सकते।
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने बुधवार को शिमला के पीटरहॉफ में बालिका के अधिकार एवं असंतुलित लिंग अनुपात के दुष्प्रभाव पर आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय शिविर के शुभारंभ कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने प्रदेश के एक स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर छोटी-छोटी लड़कियां सास एवं बहू के बीच बढ़ रहे कड़वाहट भरे रिश्तों पर अभिनय कर रही थी। उनका मानना है कि इससे लड़कियों में बचपन में ही सास के प्रति दुष्प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। ऐसे में जब उसकी शादी होती है तो सास व बहू का रिश्ता लड़ाई का घर बन जाता है। प्रदेश में महिलाओं के प्रताड़ना की एक वजह ऐसी निम्न स्तर की शिक्षा भी है जो प्रदेश की बालिकाओं को स्कूल से ही प्रदान की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इससे अच्छा है कि बच्चों को स्कूलों में देशभक्ति के गीत गाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि उनमें देश के प्रति प्रेम की भावना विकसित हो।
उन्होंने साफ कहा कि भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम करवाने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा क यदि निजी स्कूलों में ऐसा होता है तो उन्हें मिलने वाली ग्रांट भी बंद की जा सकती है।
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स्कूल शिक्षकों को सेवा विस्तार नहीं

हिमाचल में स्कूलों के शिक्षक अपने तय समय पर ही सेवानिवृत्त होंगे। मध्य सत्र में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को मार्च तक जो सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) मिलता था, उस पॉलिसी को बुधवार को कैबिनेट बैठक में पलट दिया है। अब भविष्य में किसी भी शिक्षक को सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। वहीं शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के संबंध में गत वर्ष किए गए फेरबदल में यह बदलाव होगा कि यदि शीतकालीन स्कूलों में फरवरी में बर्फ या ठंड के कारण बाधा आती है तो संबंधित उपायुक्त क्षेत्र में छुट्टियां घोषित करेंगे, जो बरसात की छुट्टियों में से काट ली जाएंगी। ग्रीष्मकालीन स्कूलों में व्यवस्था यथावत होगी। इसके अलावा स्कूलों में शिक्षकों के सामान्य तबादले अप्रैल में ही हो सकेंगे, लेकिन आवश्यक तबादला केस मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के संज्ञान के बाद वर्ष में कभी भी हो सकते हैं। इसमें भी तबादला फाइल सरकने की प्रक्रिया लंबी रहेगी। विशेष मामले मुख्यमंत्री से अप्रूव भी हो जाते हैं तो पहले निदेशालय फाइल जाएगी। उसके बाद मुख्य संसदीय सचिव के पास, फिर शिक्षा मंत्री के पास, फिर मुख्यमंत्री के पास और फिर शिक्षा मंत्री, सीपीएस व निदेशालय में जाएगी। ऐसे में तबादला मामलों की फाइल क्लीयर होने में न्यूनतम तीन माह लगेंगे। यही प्रक्रिया अब भी लागू है।
शिक्षा मंत्री आइडी धीमान कहते हैं कि सेवा विस्तार पॉलिसी को इसलिए बदला गया, क्योंकि प्रिंसिपल या वरिष्ठ स्तर पर कई शिकायतें प्राप्त हो रही थी। हालांकि तबादला प्रक्रिया यथावत रहेगी।