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अंकुर को राज्‍य स्‍तरीय सम्‍मान

सिरमौर जिला  के संगडाह के तहत आने वाली उच्च पाठशाला घाटो के छात्र अंकुर कमल को विभाग द्वारा राज्यपाल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। दसवीं कक्षा के छात्र अंकुर को वर्ष 2012 में स्काउट एंड गाइड में उत्कृष्ट कार्य के लिए उक्त राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना गया। स्कूल के मुख्याध्यापक बलवीर रमौल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा निदेशालय व उपनिदेशक उच्च शिक्षा द्वारा सोमवार को अंकुर के उक्त पुरस्कार के लिए चयनित होने की जानकारी दी तथा स्कूल को प्रशंसा पत्र भेजा। प्रदेश के कुल 20 स्काउट्स को उक्त पुरस्कार मिलेगा, जिसमें पांच छात्र व 15 छात्राएं शामिल हैं।

शिक्षक पुरस्कार आवेदनों की तिथि बढ़ी

शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदनों की तिथि बढ़ा दी है। साथ ही पात्र अध्यापकों के नाम विभाग के पास भेजने के लिए स्कूल प्रमुखों की जिम्मेदारियां भी तय कर दी हैं। विभाग ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं। विभागीय आदेशों के मुताबिक सभी स्कूल प्रमुख व शिक्षा खंड अधिकारी संबंधित खंड व पाठशाला के पात्र अध्यापक के नाम की सिफारिश 31 मई तक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में जमा करवाएंगे। आदेशों में यह भी साफ किया है कि स्कूल प्रमुख अनिवार्य रूप से पात्र अध्यापकों के नाम की सिफारिश कर विभाग के पास प्रस्तुत करेंगे, ताकि समय पर इन अध्यापकों के नाम निदेशालय भेजे जा सकें। आदेशों के मुताबिक 31 मई के बाद किसी भी अध्यापक का नाम नहीं लिया जाएगा। शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक प्रीतम ढटवालिया ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन की तिथि को बढ़ा कर 31 मई कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक व खंड शिक्षा अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि पाठशाला व संबंधित खंड के पास अध्यापक के नाम की सिफारिश 31 मई तक शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में भेजेंगे, जहां से ये मामले राज्य स्तरीय कमेटी को भेजे जाएंगे। बहरहाल शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदनों की तिथि बढ़ा दी है।

कुमारसैन की प्रियंका समाजशास्त्र में सर्वश्रेष्ठ

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में आयोजित 20वें दीक्षांत समारोह में कुमारसैन की प्रियंका को समाजशास्त्र में सर्वश्रेष्ठ रहने पर गोल्ड मेडल व डिग्री देकर सम्मानित किया गया।  गोल्ड मेडल मिलने के बाद प्रियंका ने बताया कि वह इन दिनों आईएएस की परीक्षा की तैयारियां कर रही है। उन्होंने बताया कि वह आईएएस बन कर देश सेवा करना चाहती हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुमारसैन से जमा दो की परीक्षा पास कर प्रियंका ने आरकेएमवी शिमला से बीए, एचपीयू से बीएड व समाजशास्त्र में एमए की पढ़ाई पूरी की। प्रियंका ने अपनी इस कामयाबी से अपने माता-पिता व कुमारसैन क्षेत्र का नाम रोशन किया है

बहाल रखे जाए 480 पीजीटी

प्रदेश टीजीटी कला संघ ने सरकार से 480 पीजीटी को न्याय दिलाने की मांग की है। संघ का कहना है कि प्रदेश हाई कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद-309 की अनुपालना न करने के कारण वर्ष 2011 में प्रवक्ताओं की 220 सीधी भर्ती एवं 260 टीजीटी से पीजीटी में प्रोमोट शिक्षकों की नियुक्तियों को अवैध करार दिया है। अब सरकार को इन लोगों को न्याय दिलवाने के लिए प्रयास करना चाहिए। संघ का कहना है कि माननीय न्यायालय के समक्ष राजपत्र में आर एंड पी नियमों का प्रकाशन करके शिक्षकों को न्याय दिलवाने के लिए ठोस कार्रवाई को अंजाम देकर राहत पहुंचाने का प्रयत्न करना चाहिए। प्रदेश टीजीटी कला संघ के प्रदेशाध्यक्ष राकेश कानूनगो, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उद्यम जम्वाल, संगठन मंत्री हेमराज कायस्थ, महासचिव देवराज शर्मा, पदाधिकारियों विनोद शर्मा (कांगड़ा), सुरेश पन्याली (बिलासपुर), पवन कुमार (चंबा), शेर सिंह ठाकुर (कुल्लू), मदन ठाकुर, संजय ठाकुर (हमीरपुर) आदित्य व घनश्याम (शिमला) ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 480 पीजीटी शिक्षकों को विभाग के आलाधिकारियों की गलती का खामियाजा न भुगतने दें, अपितु इन शिक्षकों को बहाल रखें।

पैट नौ वर्ष के बाद भी रेगुलर नहीं

प्राथमिक सहायक अध्यापकों (पैट) ने प्राथमिक शिक्षक संघ (पीटीएफ) के साथ मिलकर एक बैनर तले अपने हकों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया है। शिमला में रविवार को आयोजित बैठक में पैट ने पीटीएफ संघ के पदाधिकारियों को सम्मानित किया। बैठक में पैट के नियमितीकरण और ट्रांसफर पालिसी बनाए जाने को लेकर चर्चा की गई। संघ के प्रदेशाध्यक्ष लखवीर धीमान ने बताया कि पैट व ग्रामीण विद्या उपासकों की नियुक्ति एक ही पालिसी के तहत की गई थी। पूर्व सरकार ने ग्रामीण विद्या उपासकों को तो रेगुलर कर दिया, लेकिन पैट को नौ वर्ष से अधिक के कार्यकाल के बाद भी रेगुलर नहीं किया जा रहा है। इससे शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हो गए हैं। यही नहीं पूर्व सरकार ने ग्रामीण विद्या उपासकों को रेगुलर करने से पहले ही अनुबंध जेबीटी का वेतनमान दे दिया था, लेकिन पैट को अब तक अनुबंध जेबीटी का वेतन नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से ग्रामीण विद्या उपासकों की तर्ज पर बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा की शर्त थोपे रेगुलर किए जाने की मांग की है। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंद्र मनकोटिया ने बताया कि आज के बाद पैट की लड़ाई पीटीएफ शिक्षक संघ के साथ मिलकर लड़ी जाएगी।

निखिल शर्मा प्राप्‍त करेंगे उच्‍च प्रशिक्षण


जिला शिक्षा एवं शिक्षण संस्थान धर्मशाला के गतिशील व् होनहार शिक्षक को अन्तर राष्ट्रीय पठन-पाठन के मानकों पर विशेष प्रशिक्षण के लिए ‘यूनिवर्सिटी आफ लन्दन’ ने खास तौर पर आमंत्रित किया है।  निखिल इस कोर्स में न केवल दुनिया भर के गुणात्मक शिक्षा के पुह्लुओं से रूबरू होंगे, बलिक प्रदेश में इस दिशा में हो रही कारगुजारियों का भी उल्लेख करेंगे. निखिल हिमाचल प्रदेश के इकलौते प्रतिनिधि है, जिन्हें इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण में शामिल करने के लिए खास तौर पर चुना गया है। 16 जनबरी से 2 फरबरी तक लन्दन में चलने वाले इस सहभागी प्रिशिक्षण कार्यक्रम में करीब दो दर्जन देशों के चुनिन्दा शिक्षकों को आमंत्रित किया गया है निखिल शर्मा का चयन उनके शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन के प्रति योगदान के लिए किया गया है , निखिल पिछले 16 बर्षों से डाइट धरमशाला में बतौर प्रशिक्षण प्रभारी व् ग्रेडिंग सिस्टम का प्रारूप तैय्यार करने में अग्रिणी भूमिका में रहे हैं, बही, रेड रिबन क्लबों के प्रशिक्षक के रूप में भी युवाओं को जीवन कौशल के गुर सिखाते रहे हैं मूल रूप से सेराथाना निवासी निखिल बच्चों के साहित्य पर आधारित किताबें भी लिख चुके हैं, वहीँ साहित्यिक गतिबिधियों में ये जाना पहचाना चेहरा हैं निखिल की इस उपलब्धि पर त्रिगर्त वसुंधरा रंग मंच के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार, जानेमाने रंगकर्मी रोहित वोहरा, गुंजन संस्था के निदेशक संदीप, उत्थान के निदेशक, रमेश मस्ताना , ज्ञान विज्ञानं समिति के सचिव संजय चौधरी, आर टी डी सी संस्था के सुखदेव विश्व्प्रेमी ने ख़ुशी ज़ाहिर करते इसे प्रदेश व् शिक्षा जगत के लिए उपलब्धि करार दिया। जिला रेड क्लब के प्रभारी एवं जिला एड्स परियोजना अधिकारी डॉक्टर आर के सूद ने भी निखिल की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता ज़ाहिर की है


स्‍वामी विवेकानन्‍द की 150 वी जयन्‍ती

 स्‍वामी विवेकानन्‍द की 150 वी जयन्‍ती के अवसर पर शिमला के इन्दिरा गांधी खेल परिसर में युवा सेवा एवं खेल विभाग ने विभिन्‍न सांस्‍कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। आयोजन के मुख्‍य अतिथि विभाग के उप निदेशक श्री विरेन्‍द्र नेगी थे1  जिला युवा सेवाऐं एवं खेल अधिकारी ओ पी भोटा ने स्‍वामी विवेकानन्‍द के चित्र पर माल्‍यार्पण किया और द्वीप प्रजवल्लित कर कार्यक्रम का शुभारम्‍भ किया।  अपने सम्‍बोधन में मुख्‍यातिथि ने युवाओं से स्‍वामी विवेकानन्‍द की शिक्षाओं को जीवन में आत्‍मसात करने का आहवान किया।
उन्‍होने युवाओं से एक स्‍वच्‍छ समाज में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह कर विवेकानन्‍द की शिक्षाओं के प्रसार प्रचार पर बल दिया। उन्‍होने विजेताओं को पुरस्‍कार भी वि‍तरित किये।

 परिणाम इस प्रकार रहे।
चित्रकला प्रतियोगिता 
प्रथम  अतर सिंह, ढली
द्वितीय नयनसी, ढली
तृतीय राधा, ढली

निबन्‍ध लेखन 
प्रथम  मानसी, ढली
द्वितीय निशान, शिमला
तृतीय सुरेन्‍द्र,



भाषण प्रतियोगिता
प्रथम रजनी, शिमला
द्वितीय प्रतिभा, शिमला
तृतीय सुनीता, शिमला


लोक समूह गान
प्रथम  सांस्‍कृतिक दल ठियोग
द्वितीय आई टी आई शिमला


ओ पी भोटा ने बताया कि जिले भर में सात अलग अलग स्‍थानों पर स्‍थानीय युवा मण्‍डलों के सहयोग से इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाऐगे। राज्‍य स्‍तरीय कार्यक्रम 19 जनवरी 2013 को शिमला में आयोजित किया जाऐगा।

सर्विस बुक ऑनलाइन करने पर खफा

मुख्याध्यापक संवर्ग अधिकारी संघ जिला ऊना ने विभाग द्वारा सेवा पंजिका को ऑनलाइन करने के फरमान जारी करने का कड़ा विरोध जताया है। संघ के प्रधान नरेश सहोड़, महासचिव राम कुमार, प्रतिनिधियों रूप लाल शर्मा, सत्य देव शर्मा ने कहा कि सेवा पंजिका को अतिशीघ्र ऑनलाइन करने के विभाग इस वर्ग पर दबाव डाल रहा है और आनन-फानन में शिक्षा विभाग ऐसे फैसलों को थोपकर वर्ग विशेष के हितों के साथ कुठाराघात कर रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है और अधिकतर मुख्याध्यपक तथा प्रधानाचार्य सेवा पंजिकाएं उठाकर जगह-जगह धक्के खा रहे हैं और विभाग द्वारा कार्य में देरी तथा त्रुटि के लिए पाठशालाओं के मुखियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। संघ ने कहा कि विभाग को सुविधाओं के अभाव व बिना किसी प्रशिक्षण के ऐसी कार्रवाई को नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि विभाग पहले मुख्याध्यापकों तथा प्रधानाचार्य को इस वर्ग को विशेष प्रशिक्षण दें तथा सभी पाठशालाओं में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करवाए और इस कार्य को करने के  लिए समय सीमा को भी बढ़ाया जाए। संघ ने सरकार से पंजाब राज्य की तर्ज पर मुख्याध्यापकों व प्रधानाचार्यों की ग्रेड-पे को बढ़ाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा विभाग ने सेवा पंजिका को ऑनलाइन करने के तुगलकी फरमान को वापस न लिया तो संघ शिक्षा विभाग के विरुद्ध अपने आंदोलन को लेकर रणनीति तैयार करेगा।

शिक्षा बोर्ड होगा ऑनलाइन

शिक्षा बोर्ड को पूर्णतया कम्प्यूटरीकृत किया जाएगा, ताकि स्कूलों और बच्चों को इसका लाभ मिलने पर कार्य करवाने के लिए जगह-जगह के चक्कर न काटने पड़ें। बिना विलंब के समय पर उनके कार्य बोर्ड करने में सक्षम और सुदृढ़ हो। यह बात हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के नवमनोनीत अध्यक्ष बलराम शर्मा ने नैहरनपुखर में पत्रकारों से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक प्रशासनिक सुधार किए जाएंगे, क्योंकि पूरे प्रदेश में आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर कई प्रश्न उठे थे, जिन पर पूर्ण रूप से अंकुश लग सके। उन्होंने कहा कि सिस्टम की कमियों को दूर करने के साथ-साथ लोगों व प्रदेश के स्कूलों से भी सुझाव मांगेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आठवीं व 11वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षाएं न होने के कारण बोर्ड का बोझ भी कम हुआ है। इसलिए शीघ्र बोर्ड पांचवीं कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप के लिए परीक्षाओं का आयोजन करेगा। इससे चुने गए छात्रों का मनोबल बढ़ेगा,बल्कि इसमें सफल होने के लिए प्रयास करेंगे। इससे शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता आएगी और वजीफा पाने वाले छात्र अच्छे भविष्य की तरफ अग्रसर होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड का अध्यक्ष बनने से पूर्व वे कई विभागों में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं और उसका लाभ उन्हें बोर्ड का कार्य करने में भरपूर समय मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य यही होगा कि प्रदेश के स्कूल पूरी तरह से नकल से मुक्त हों। उन्होंने कहा कि बच्चों का रुझान शिक्षा से न हटे, इसके लिए अकेला बोर्ड ही कुछ नहीं कर सकता और लोगों का पूर्ण विश्वास शिक्षा के प्रति बना रहे, उसमें शिक्षा के क्षेत्र में और सुधार लाने की आवश्यकता है।

दोहरी वरिष्ठता सूची को खत्म करने की मांग

हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ की शिमला जिला इकाई ने सरकार से पदोन्नत प्राध्यापकों की दोहरी वरिष्ठता सूची को खत्म करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि मुख्याध्यापकों के पदों को भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत सिर्फ स्नातक अध्यापकों से भरा जाए। संघ के जिला अध्यक्ष लाल चंद चंदेल, कार्यकारी अध्यक्ष राजीव मोहन सिंह, महासचिव हरविंद्र कंवर, वरिष्ठ उप प्रधान निहाल कंवर, महेंद्र चौहान, कृष्ण ठाकुर, प्रवक्ता जितेंद्र ठाकुर, राकेश कटवाल, कोषाध्यक्ष अमर चौहान तथा सलाहकार हरनाम धर्मा ने संयुक्त बयान में सरकार से उक्त मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पदोन्नत प्राध्यापकों के पदाधिकारी संघ के आगामी चुनाव को देखते हुए भ्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। बयानबाजी करने वाले पदोन्नत प्राध्यापकों के पदाधिकारी शायद यह भूल रहे हैं कि प्रारंभिक शिक्षा प्रणाली लागू कर टीजीटी के लिए संकट मोचक बनने का श्रेय लेने की कोशिश में वे यह भूल गए हैं कि उन्होंने टीजीटी के लिए सृजित मुख्याध्यापकों के 2692 तथा खंड प्रारंभिक अधिकारियों के 117 पदों को समाप्त करवा टीजीटी वर्ग के पदोन्नति के रास्तों को बंद करवा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पदोन्नत प्राध्यापक संघ के कई सदस्य नवीं व दसवीं को पढ़ाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं, मगर उच्च पाठशालाओं में मुख्याध्यापक बनने से उन्हें कोई गुरेज नहीं। संघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि विभाग छह हजार पदोन्नत प्राध्यापकों को लाभ देने के मकसद से 18 हजार स्नातक अध्यापकों के हितों को ताक पर रख रहा है।

APTITUDE INDEX TEST 26 तक करें आवेदन



शिमला — अपै्रल माह में होने जा रही स्टूडेंट ग्लोबल एप्टीट्यूड इंडेक्स (एसजीएआई) परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि शिक्षा विभाग ने बढ़ा दी है। इसके इच्छुक छात्र अब 26 दिसंबर तक एसजीएआई परीक्षा के लिए आवेदन कर पाएंगे। पूर्व में इसकी अंतिम तिथि 20 दिसंबर तय की गई थी। इस परीक्षा में 10वीं के छात्र बैठ पाएंगे। एसजीएआई परीक्षा का मकसद छात्रों की योग्यता का आकलन करना है। यह परीक्षा अपै्रल माह के पहले व दूसरे सप्ताह में ली जाएगी। शीघ्र ही शिक्षा विभाग इसकी अंतिम तिथि निर्धारित कर लेगा। परीक्षा में बैठने के इच्छुक छात्रों को इसके लिए 100 रुपए चुकाने होंगे।

हिमाचल डीपीई (शारीरिक शिक्षक) एसोसिएशन

हिमाचल डीपीई (शारीरिक शिक्षक) एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि उन्हें लेक्चरर पदनाम के साथ वेतनमान भी मुहैया कराया जाए। एसोसिएशन का कहना है कि शैक्षणिक योग्यता लेक्चरर के समान होने के बावजूद उन्हें पिछले लंबे समय से एक ही पद पर सेवानिवृत्त होना पड़ रहा है। इससे इस वर्ग में निराशा है। सोमवार को यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के नवनियुक्त अध्यक्ष प्रवीण पठानिया ने कहा कि समस्याओं को लेकर सारा मसौदा तैयार कर लिया गया है। शीघ्र ही इस बारे में मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल से चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि बेसिक क्वालिफिकेशन इस वर्ग के लिए एमए है और ऐसे में उन्हें टीजीटी के समान स्केल दिया जाता है जबकि स्थिति यह है कि स्कूलों में जमा एक और दो की कक्षाओं को वे न केवल पढ़ाते ही हैं, प्रेक्टिकल भी करवाते हैं। मॉर्निंग असेंबली के अलावा दिनभर स्कूल में अनुशासन बनाना भी इस वर्ग की अहम भूमिका रहती है। इन सब जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें प्रमोशन से महरूम रखना अब बदलते परिवेश में न्यायोचित नहीं है। 
रणनीति बना रहे 
कॉन्फ्रेंस में मौजूद अन्य पदाधिकारियों सुरजीत ठाकुर, प्रदीप ठाकुर, सुनील कपिल, राजेश शर्मा, नानक चंद के अलावा भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र अत्री भी मौजूद थे। पठानिया ने बताया कि समस्याओं को लेकर एक चार्ट बनाया जा रहा है और इस बारे में मुख्यमंत्री से शीघ्र ही प्रतिनिधिमंडल मिलेगा, जिसमें इस वर्ग के लिए पॉलिसी बनाने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र अत्री खुद स्पोट्र्समेन रहे हैं और उन्होंने भी विश्वास दिलाया है कि वे इस समस्या के हल के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे।

राष्ट्रीय सेवा योजना का चार दिवसीय राज्‍य स्‍तरीय शिविर संपन्न


मण्‍डी जिला के सरकाघाट में प्रदेश भर से आए 12 जिलों के 300 राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों का चार दिवसीय शिविर संपन्न हो गया। समारोह के मुख्यातिथि उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. ओपी शर्मा थे और कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त उपशिक्षा निदेशक हुकम चंद गुप्ता ने की। प्रदेश के एनएसएस संयोजक दलीप ठाकुर ने चल रही एनएसएस की गतिविधियों का ब्योरा दिया। शिविर में भाग ले रहे 300 छात्र-छात्राओं में से 100 छात्र-छात्राएं 26 जनवरी को प्रदेश स्तरीय परेड में भाग लेंगे और इन्हीं छात्रों में 20 छात्रों का दल झांकी में शामिल होगा। 
ओपी शर्मा ने कहा कि प्रदेश के 660 स्कूल में मौजूदा वक्त में 58 हजार एनएसएस स्वयंसेवियों को राष्ट्रीयता की भावना श्रम का महत्व और अच्छे नागरिक बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डॉ. शर्मा ने कहा कि आगामी सत्र से प्रदेश के सभी जमा दो और उच्च विद्यालयों में आईटी की शिक्षा नि:शुल्क प्रदान की जाएगी। 
गणतंत्र परेड में शामिल होने वाले छात्रों में नीरत, सन्नी नेगी, रोहित कुमार, काकू, जितेंद्र, संजय कुमार, किरन सारटा, जय राम, राहुल राणा, दीपक, चंद्रमणि, अमित, हेमंत शर्मा, राहुल शर्मा, बबलू, हरी कृष्ण, शशि कुमार, दीपक, सुनील कुमार, चेतन, शशि कला, महेंद्र कुमार, सुरेंद्र, पंकज, राजेश, राजेश वर्मा, निखिल, राजीव, हरिदास, राहुल धीमान, विकेश कुमार, होशियार सिंह, सुनील, नरेंद्र, सौरभ, बंटी, सुनील कुमार, शुभम, योगिंद्र जबकि छात्राओं में दीप शिखा, शानिली, रेखा, निशा ठाकुर, मनीषा, शालू, पूजा, ममता, सुमनलता, प्रीति, स्मृति, तेन्जिन, रेखा, पूजा, मोनिका, सुमन लता, मंजू, पूनम, दिव्यानी, सरला, निशा, मनीषा, निशा, वंदना, गुड्डी, सोनिया, रुमा, सीता, सन्नी, मीरा, दीपिका, रजनी, रेणु, शालिनी, अंजू देवी, कनिका, काजल, कविता, दीक्षा, रेशमा, दीक्षा अभय, शामिल है। सांस्कृतिक टोली में रिंकू, ललित कुमार, पंकज, बंटी, जीत सिंह, अनिल तोमर, अरुण देवयी, महेंद्र सिंह, लेख राज, मनजीत, रीना एकादशी, आरती, अंकिता, चंद्रकला, काजल ठाकुर, नीलम, अंबिका, इंदू ओर कृष्ण शामिल हैं। यह सभी छात्र-छात्राएं आगामी गणतंत्र दिवस परेड के राज्यस्तरीय समारोह का हिस्सा होंगे।

शिक्षा के मॉडल का अन्‍य राज्यों द्वारा अनुसरण


 साक्षर भारत मिशन 2012 के तहत देश के पिछड़े जिलों में शुमार चंबा जिला में निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए अपनाए गए शिक्षा के मॉडल का आंध्र व कर्नाटक राज्यों द्वारा अनुसरण करने के बाद अब शिक्षा क्षेत्र में देश भर में अव्वल दर्जा प्राप्त केरल राज्य इसी तर्ज पर विकास का नया मॉडल अपनाएगा। साक्षर भारत मिशन के तहत दिसंबर अंत से लेकर जनवरी दस तक चलने वाले जन संवाद कैंपेन की तर्ज पर केरल राज्य में विकास का नया मॉडल अपनाने के लिए जनसंवाद पदयात्रा का आगाज होगा। हिमाचल के इस अनुभव को केरल ने अपनाने का निर्णय लिया है और विकास का नया मॉडल अपनाने के लिए केरल शास्त्र साहित्य परिषद (केएसएसपी) अपना अहम रोल निभाएगी। पंचायत स्तर पर विकास से संबंधित इस पदयात्रा में लोगों के सुझाव लेकर वहां की सरकार को इसका रिपोर्ट कार्ड प्रेषित किया जाएगा। राज्य संसाधन केंद्र शिमला के निदेशक डा. ओपी भूरेटा ने इसकी पुष्टि की है। गौर हो कि हिमाचल का अकेला जिला चंबा देश भर में पिछड़े जिलों में शामिल है। उधर, शिक्षा की अलख जगाने के लिए शुरू किए जा रहे इस जन संवाद कैंपेन का अनुसरण करते हुए केरल राज्य ने इसी तर्ज पर वहां पर विकास का नया मॉडल अपनाने को लेकर जन संवाद पदयात्रा शुरू करने का फैसला लिया है। इस कार्य के लिए ज्ञान-विज्ञान समिति की सिस्टर आर्गेनाइजेशन केरल शास्त्र साहित्य परिषद अपनी अहम भूमिका निभाएगी। क्योंकि केरल शिक्षा में तो अव्वल है ही अब उसने विकास का नया मॉडल अपनाकर देश भर में पहला पायदान झटकने की जुगत भिड़ा दी है। केरल राज्य की तमाम ग्राम पंचायतों का दौरा कर जनता के सुझाव व दिक्कतें जानने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार कर सरकार को प्रेषित किया जाएगा। सुझाव के आधार पर ही वहां विकास का नया मॉडल बनाने के लिए अगला महत्त्वाकांक्षी प्लान बनेगा।

हिमाचल में शत-प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे


 हिमाचल देश का ऐसा राज्य बन गया हैं, जहां शत-प्रतिशत बच्चे स्कूल जा रहे हैं। शिक्षा से जुड़ी प्रथमसंस्था की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में छह से 14 आयु वर्ग के 99.7 फीसदी बच्चे स्कूलों में भर्ती हैं। बाकी के 0.3 फीसदी स्कूल न जाने वाले अधिकांश बच्चे प्रवासी कामगारों के बताए जा रहे हैं। देश में कुछ ऐसे भी राज्य हैं, जहां सात फीसदी से अधिक बच्चों ने स्कूल की दहलीज पर कदम नहीं रखा है। एक दशक पहले हिमाचल में 19 फीसदी से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। इससे साफ है कि हिमाचल के बाशिंदे अब शिक्षा के महत्त्व को समझने लगे हैं। हाल के वर्षों में शिक्षा विभाग द्वारा किए गए प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश के नौनिहाल शिक्षा के महत्त्व को समझने लगे हैं। प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक की शिक्षा सभी छात्रों को निःशुल्क में दी जा रही है। अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 के लागू हो जाने से हिमाचल में स्कूल न जाने वाले 0.3 बच्चों के भी शीघ्र साक्षर होने की उम्मीद जगी है। छात्रों के पंजीकरण में हिमाचल अब त्रिपुरा और केरला से एक कदम ही पीछे रहा है। उक्त राज्यों में 99.9 फीसदी बच्चे स्कूलों में भर्ती हो चुके हैं। यानी 0.1 फीसदी बच्चे ही स्कूलों से बाहर है। इसके विपरीत मेघालय में सबसे अधिक 7.2 फीसदी बच्चों ने स्कूल नहीं देखा है। आंध्रप्रदेश में 3.3 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में 2.5, आसाम में 5.0, बिहार में 3.5, छतीसगढ़ में 1.9, दमन-दियू में 0.4, गोआ में 0.4, गुजरात में 4.0, हरियाणा में 1.1, झारखंड में 3.8, कर्नाटका में 3.1, महाराष्ट्रा में 1.1, मणिपुर में 1.8, मिजोरम में 2.2, नागालेंड में 2.2, ओडिसा में 4.5, पंजाब में 1.7, राजस्थान में 5.8, सिक्किम में 1.9, तमिलनाडू में 1.0, त्रिपुरा में 1.8, उत्तरप्रदेश में 5.2, उत्तराखंड में 1.7 फीसदी तथा पश्चिम बंगाल में 4.6 फीसदी बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। शत-प्रतिशत साक्षरता को कभीं एजुकेशन गारंटी स्कीम सेंटर, कभीं अल्टरनेटिव इनोवेटिव सेंटर और अब गैर-आवासीय ब्रिज कोर्स आरंभ (एनआरबीसी) किए जा रहे हैं।